जागो obc sc St अल्पसंख्यक जागो और सांपों का अंत करो।

एक कुआँ में कुछ मेंढक रहते थे..उनमेंसे बहुत से मेढकों को लगता था कि बाकी मेंढक उनका हक खा रहे हैं..कुछ ज्यादा खाने लगे हैं और मोटे हो रहे हैं..कुछ ज्यादा ऊँची छलाँगें लगाने लगे हैं..अफवाह तो ये भी उठी की कुछ मेंढक एसडीएम भी बनने लगे हैं..बहुसंख्यक मेंढकों के पेट में मरोड़ उठने लगी थी और उन्होंने सांपों से गठबंधन कर लिया..

अब कुँए में सर्पों का राज था..पहले बहुसंख्यक मेंढक खुश थे कि अब लंबी लंबी उछालें मैनेज हो गईं हैं..मोटे मेढकों की आबादी भी अब कम दिखने लगी है..मेढकों के खानेपीने पर सांपों का कंट्रोल था…

कुछ मेढकों को भूख से मरते भी देखा जाने लगा जिनकी लाशें अंधेरे में गायब हो जाती थीं..कुछ समय बाद अंधेरे में कुछ परिवार भी गायब होने लगे..कुछ के बच्चे बच्चियों लापता होने लगीं…कुँए में बहुत शांति थी श्मशान जैसी शांति..(क़ब्रिस्तान की जगह अब श्मशान बन गए थे)…

बहुसंख्यक अब घबराने लगे थे..उनका इस कुएं में दम घुटने लगा था..लेकिन अब सांपों ने सांस लेने की भी सीमा निर्धारित कर दी थी..बहुसंख्यक भाग जाना चाहते थे लेकिन सांपों ने दीवारों पर पहरे बैठाए थे…….उन्हीं मेढकों में से कुछ मेंढकों को अब श्याह रातों में सपने आने लगे थे कि एक दिन कुँए में जहर फैला है और सभी मेढ़क गायब है…सांपों ने कोई दूसरा कुआँ खोज लिया है जहां के भी बहुसंख्यक मेंढकों को लगने लगा है कि बाकी मेंढक उनका हक खा रहे हैं..कुछ ज्यादा खाने लगे हैं और मोटे हो रहे हैं..कुछ ज्यादा ऊँची छलाँगें लगाने लगे हैं..वहां भी अफवाह तो ये उठी है की कुछ मेंढक एसडीएम भी बनने लगे हैं..सम्भवतया ये अफवाह भी वहां कुछ सांपों ने ही फैलाई थी और सांपों ने वहां भी वही प्रकिया अपनायी। मेढक रूपी मानव कुछ तो अक्ल का प्रयोग करो और देखो सांपों ने तुम्हें और तुम्हारे बंस को खत्म करने की रणनीति बनायी है।

जागो obc sc St अल्पसंख्यक जागो और सांपों का अंत करो।
मनोज यादव

संयोजक

राष्ट्रीय चेतना परिषद

9307386032

Leave a comment